आज हम ऐसे सख्स के बारे में बात करने जा रहे जिन्होंने बहुत कम समय ,में अपनी अलग पहचान बनाई है उनका नाम नाम है कवी महेंद्र मधुर जी जो बहुत सुन्दर कविता करते है, जिन्होंने बहुत जल्द ही लोगों का प्यार अपनी तरफ आकर्षित किया है आज के युवा उनसे सुनना काफी पसंद करते हैं उनकी प्रसिद्ध कवितायों में ऐसे एक है -हमारी याद में उनके नयन गिले होंगे और दूसरी है तुम गुंजा हुई होती तो में चन्दन हुआ होता ये दर्शाता है कि इस कवि कि लेखनी प्रेम को ज्यादा बढ़ावा दे रही है या यूँ कहे तो प्रेम के प्रति ज्यादा लगाव है |
बिछे थे फूल जितने आज पथरीले हुए होंगे,सिसकती चांदनी में हाथ जब पीले हुए होंगे हमें परदेश में बेमौसमी वर्षा बताती है,हमारी याद में उनके नयन गिले होंगे
है जाना भी असंभव है लौट आना भी असंभव है, असंभव छोड़ना और साथ लाना भी असंभव है अजब से मोड़ पर आ गया हूँ अब जहाँ तुमको बुलाना भी असंभव है भुलाना भी असंभव है
मोहब्बत कि नदी तेरी तरफ ही मोड़ दी हमने, अधूरी अनसुनी सच्ची कहानी जोड़ दी हमने तुझे हर बार पौ हर जनम में साथ हो तेरा, तुम्हे एक बार पाने कि तमन्ना छोड़ दी हमने
नही मिला अब तक कोई तुम्हारे गात के जैसा, किसी दिन प्रात के जैसा किसी दिन रात के जैसा तुम्हारी देह छूकर में हमेशा भीग जाता हूँ, तुम्हारा ये बदन अषाढ़ के बरसात के जैसा
हमारी प्रीत का कुछ इस तरह वंदन हुआ होता,तुम्हारा भी मन हुआ होता हमारा भी मन हुआ था बैठकर नाव में तुमको नदी के पार ले जाता, जो तुम गुंजा हुई होती तो में चन्दन हुआ होता
हमें मिलना था जिसमें अभी वो इतवार बाकी है,हमारी जिंदगी में प्यार का त्यौहार बाकी है कभी बातें पुरानी सोंचता हूँ और कहता हूँ, सभी कुछ मिल गया लेकिन तुम्हारा प्यार बाकी है
हजारो बार पूंछा है मगर उत्तर नही आया, हमारे प्यार में कोई सुखद मंजर नही आया बहुत चाहा में तुमसे लिपटकर जान दे दूँ पर, तुम्हारे पास आने का कोई अवसर नही आया
कोई मौसम, कोई भी दिन, कोई भी पल नही जाता,बहुत जलता है मेरा दिल मगर क्यूँ जल नही जाता मिलन कि आग से तन इसलिए महफूज रहता है, भिगोये बिन तुम्हारी याद का बदल नही जाता
जो भारत जंग लड़ता है बड़ी मशहूर लड़ता है, वो दुश्मन हार जाता है जो हो मगरूर लड़ता है हमारे और उसके युद्ध में फर्क है इतना, वहां बारूद लड़ता है, यहाँ सिन्दूर लड़ता है
शुरू से अंत तक सारी कहानी याद है हमको,परस्पर दी जो आपस में निशानी याद है हमको परीक्षा कक्ष का नंबर न भूले हैं न भूलेंगे, तुम्हारा रोल नंबर तक जुबानी याद है हमको
लड़कपन एक जैसा है जवानी एक जैसी है, निशाना एक जैसा है निशानी एक जैसी है हमारी जिंदगानी का अलग है व्याकरण लेकिन, किताबे एक जैसी है कहानी एक जैसी है
तुम्हारे पास आने के अभी तक सुअवसर कम नही आये, अभी तक हम ईलाहाबाद के संगम नही आये कभी गंगा,कभी यमुना बुलाती थी हमें लेकिन, किसी दिन तुम नही आई किसी दिन हम नही आये
कभी आँखे जो देखू तो में जादू भूल जाता हूँ, में यमुना भूल जाता हूँ में सरयू भूल जाता हूँ तुम्हारी देह का चन्दन मुझे पागल बनाता है, तुम्हे छू लूँ तो में हर खुशबु भूल जाता हूँ
महावर से रगेंगे हम,कुंवारे पाँव फागुन में,करेंगे नेह से सर पर तुम्हारे छाँव फागुन में शहर में क्या धरा है, देखना सुन्दर धरा है तो, कभी आना हमारे घर हमारे गाँव फागुन में
यहीं कोशिस रही मेरी किसी का मन न रूठे, जिसे जीवन समझता जो वो जीवन धन न रूठे यही है कामना मेरी सभी खुशहाल हो जग में, किसी कि जिन्दगी से प्यार का सावन नही रूठे
कहाँ किस को कभी गुजरी कहानी याद रहती है, न राजा याद रहता है न रानी याद रहती है मोहब्बत में ही ताक़त है जो दुनिया को अमर कर दें, हमें सदियों तलक मीरा दीवानी याद रहती है
पड़ी छाया पीताम्बर कि तो पीली हो गयी जमुना, कभी राधा ने जो देखा तो नीली हो जमुना हरे,पीले,गुलाबी और नीले रंग ने मिलकर, गुलाबी कर दिया मौसम रंगीली हो गयी जमुना
सुकोमल हाथ से कभी भी न छुई रोली,बनाती तो रही है वो, सदा आँगन में रंगोली बरस बाईस गुजारे पर नही छूने दिया तन को, वो पहली बार खेलेगी पिया के गाँव में होली
रंगीले स्वप्न जो देखे उसी में खो गयी होगी, मोहब्बत से भरे म्रिदुगीत में बो गयी होगी अचानक ही हमारे आगमन कि सूचना सुनकर, वो सर से पाँव तक जयपुर के जैसी हो गयी होगी
उमड़ते जुल्म का हर एक निशाना हार जाता है, कनीजों से कभी शाही घराना हर जाता है कभी भी आजमां लेना मोहब्बत को मगर सुनलो,मोहब्बत जीत जाती जमाना हार जाता है
हमारी जीत का स्वर्णिम सुखद आभाश हो जाता , मेरे बापू को भी मुझ पर बड़ा विश्वाश हो जाता ये सारा नाश सत्यानाश सब तेरा कराया है, अगर तू साथ न पढ़ती तो में भी पास हो जाता